Chal Pari Jindagi Hindi Paperback (August 2024)
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Book Details
| Author | Poona Devi “Pratha” |
| Pages | 171 |
| Book Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-19545-58-2 |
| Dimensions | 21.7 x 14.5 x 0.2 cm |
| Item weight | 140 gm |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | August 2024 |
| Book Genre | Novel |
| Publisher | BMP PUBLISHER |
| Seller | Buks Kart “Online Book Store” |
Description
कहते हैं कि शिक्षा सभी समस्याओं का हल है। लेकिन कभी-कभी शिक्षा समस्याओं को भी जन्म दे देती है यदि हम शिक्षा का गलत मतलब निकालने लगे तो। मैंने अपनी इस रचना “चल पड़ी जिंदगी” में यही बताने और इस अनोखी समस्या को समझाने की कोशिश किया है। इसमें मैंने आज से लगभग पचास या सौ साल बाद की स्थिति को चित्रित करने का प्रयास कर रही हूँ। शिक्षा के बाद कैरियर बनाना और कैरियर बनाने के क्रम में अपनी बढ़ती उम्र को नजर अंदाज करना सामान्य बात हो गई है।
पहले प्रत्येक कार्य के लिए एक उम्र निर्धारित थी, लेकिन आज इस भौतिकवादी युग में उम्र मायने नहीं रखता बल्कि आज के इस अति महत्वाकांक्षी युग में बच्चे और पेरेंट्स पहले अपने कैरियर को फोकस करते हैं। यह एक तरह से सही भी है लेकिन कैरियर में उच्चाकांक्षाओं की पूर्ति में अपनी जिंदगी को रोक कर रखना भी तो गलत है। कैरियर के पीछे भागने के कारण अनेक समस्याएं और दुष्परिणाम आज हमें देखने को मिल रही है इसे ही कलमबद्ध करने की यह एक छोटी सी कोशिश की है।
इस कहानी में पीढ़ी दर पीढ़ी उच्च महत्वाकांक्षाओं के पीछे भाग रहे हैं। आखिर समय पर शादी नहीं करेंगे या खानदान को आगे नहीं बढायेंगे तो जिंदगी तो रुक ही जाएगी न, लेकिन मैंने कहानी का नाम “चल पड़ी जिंदगी” दिया है तो पढ़कर पता चलेगा कि रुकी हुई जिंदगी कैसे चल पड़ी ? ऐसे इसकी थोड़ी सी सोच का उल्लेख मैंने अपनी एक और रचना “आ अब लौट चलें” में किया था। इसमें मैं इसका भयावह रूप दिखाने की कोशिश करूँगी।
पूनम देवी ‘पृथा‘
लेखिका





