Siyasat Ne Sataya (Hindi Paperback December 2025)
Original price was: ₹ 250.00.₹ 200.00Current price is: ₹ 200.00.
Book Detail
| Author | Nanhe Singh Thakur “Aadam” |
| Pages | 110 |
| Book Format | Paperback |
| ISBN 13 | 978-81-993479-6-0 |
| Dimensions | 21.7 x 14.5 x 0.5 cm |
| Item weight | 150 gm |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | December, 2025 |
| Book Genre | Gazhal |
| Publisher | Bright MP Publisher |
| Seller | Buks Kart “Online Book Store” |
Description
‘सियासत ने सताया’ प्रकाशित कराते हुए हर्षित और गर्वित हूँ। ग़ज़ल विधा की यह मेरी बीसवीं पुस्तक है तथा प्रकाशन क्रम में सम्प्रति रूप से छयालसवीं पुस्तक है। मेरी इस पुस्तक में सौ गजल है। आज ग़ज़ल सामाजिक राजनैतिक व्यवस्था के खिलाफ खुलकर प्रहार करती दिख रही है। इस पुस्तक में प्रकाशित मेरी सभी ग़ज़लें सियासत की विसंगति पर प्रहार करती है। हर ग़ज़ल सियासत पर है हर ग़ज़ल का शेर भी सियासत पर है। आज लेखन कार्य के लिए सोसल मीडिया के विविध माध्यम उपलब्ध है। यह प्रमुख ग्रुप “हिन्दी साहित्य अकादमी म.प्र. इकाई, राष्ट्रीय तूलिका मंच, साहित्य उपवन रचनाकार मंच,शब्दों की दुनियां जैसे मंच है। किंतु ग़ज़ल के क्षेत्र में खुशामदीद और उड़ान जैसे मंच सिर्फ ग़ज़ल का सूक्ष्म अभ्यास सतत रूप से कराते हैं। इन मंचों पर दैनिक सृजन से हजारों सम्मान पत्र विविध विधाओं की दैनिक रचनाओं को जब तब मिले हैं। आज भी यह क्रम सतत् जारी है। सभी ग्रुप एडमिन और उनकी टीम श्रेष्ठ साहित्यकारों से सजी हुई है। साहित्य उपवन रचनाकार के एडमिन रोहित कुमार रोज़ जी का शिक्षकत्व भाव, उत्साह वर्धन और प्रशंसा के कारण ही मैं ग़ज़ल कहना सीख पाया हूँ। अभी भी ग़ज़ल को और मांजना बाकी है। अभी भी सीख ही रहा हूँ। मेरा मानना है कि ग़ज़ल का हर शेर अपने आप में एक पूर्ण कविता होता है। मतला से प्रारंभ होकर अनुवर्ती शेर के साथ मक़्ता पे जाकर ग़ज़ल समाप्त हो जाती है।शे’र की संख्या निर्धारित नहीं है लेकिन विषम संख्या में पांच से लेकर नौ शेर तक की संख्या वाले शे’र की ग़ज़ल अक्सर सुनने, पढ़ने मिलती है। मुझे यह बतलाते हुए भी हर्ष है कि इस पुस्तक की कुछ ग़ज़लों को गांधी विश्वविद्यालय वाराणसी में पदस्थ मनोविज्ञान के प्रोफेसर दुर्गेश उपाध्याय ने अपने मधुर स्वरों से स्वर बध्द करके यू ट्यूब चैनल के माध्यम से विश्व भर के ग़ज़ल शौक़ीन बंधुओं तक पहुँचाया है।इस पुस्तक की कुछ ग़ज़लें वर्चुअल ग्रुप में सम्मानित भी हुई है।
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