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Prachy Sanskriti ke Jharokhe se (प्राच्य संस्कृति के झरोखे से) Paperback Feb 2021

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Book Details

AuthorKailashchand Sharma “Shanki”
Pages82
Book FormatPaperback
ISBN 13978-81-950286-7-2
Dimensions21.7 x 14.5 x 0.5 cm
Item weight120 gm
LanguageHindi
Publishing YearFeb 2021
Book GenrePoetry
PublisherBright MP Publisher
SellerBuks Kart “Online Book Store”

भारत की संस्कृत कितनी महान रही है इस तथ्य को कहने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि इस सृष्टि पर बसे विभिन्न देश किसकी महत्ता के समक्ष सदैव ही नतमस्तक होते रहे हैं। इस देश की समृध्दि को प्रमाणित कराती यह बात भी कही जा सकती है कि विभिन्न देशीं के शासकों की उत्कंठा इस भारत में बसकर अपने को संस्कृत रूप में मज़बूत करने भी सदैव रही है। अतरू भारत की संस्कृति की महानता तो स्वयंसिद्ध रही है। भारत की प्राच्य संस्कृति के झरोखे से गुजरने का मेरा मत और उद्देश्य भी यही रहा है कि इस महान भारत भूमि में जन्म पाकर इसके विषय में कुछ लिखकर इसकी संस्कृति के प्राच्य इतिहास को अपने विवेक से सरल भाषा में समाज को कुछ देकर कृतार्थ करूँ। अतरू इसकी संस्कृति के इतिहास के विविध कालखंडों एवं पक्षों से जुड़े तथ्यों को उस पुस्तक का रूप देने का यह प्रथम प्रयास आपके समक्ष विवेचना के रूप में प्रस्तुत है और आपकी सार्थक सहमति की अपेक्षा भी है । प्रस्तुत पुस्तक में मेरे द्वारा भारत की सांस्कृतिक धरोहर, पंरपराओं को सहेजने का प्रयास किया गया है आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि यह पुस्तक आपको अवश्य पसंद आयेगी।

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Description

लेखक डाॅ. कैलाशचन्द शर्मा ‘शंकी’ हिन्दी साहित्य क्षेत्र के जाने माने लेखक हैं जिनको भारतीय संस्कृति, आचार विचार, व्यवहार, शिक्षा, जैसे विषयों पर लेख लिखना पंसद हैं। कविवर एवं लेखक के द्वारा लिखे गये लेख, काव्य इत्यादि हिन्दी समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपते आये हैं और लेखक के द्वारा पुस्तके भी लेख कर प्रकाशित हुयी हैं जो हिन्दी जगत के पाठकगणों के द्वारा काफी प्रेम एवं भूरि-भूरि सराहना की पात्र रहीं हैं। आगे भी निरंतर लेखन कार्य जारी रहेगा और पाठकों को अच्छी व प्रभावशील रचनाएं पढ़ने को मिलेगीं।

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