पुस्तक परिचय : बालक ही कल का राष्ट्र निर्माता है। विद्वानों, महापुरुषों तथा राष्ट्र निर्माताओं की जीवनी से यह ज्ञात होता है कि बचपन में ही उनमें चरित्र के लिए आवश्यक संस्कारों, मूल्यों एवं आदर्शों का बीजारोपण हो गया था। बच्चों की सच्ची साथी पुस्तकें ही हो सकती हैं। इसी मुहिम में बालसाहित्यकारों की संख्या करीब ढाई सौ से भी अधिक है।
मैंने भी यह बाला काव्य संग्रह भांजे विहान की सुंदर भाव भंगिमाओं को देखकर लिखा है। उसके जैसे सभी बच्चों के लिए समर्पित है, यह मेरा बाल काव्य संग्रह