Meri Kuch Charchit Kavitayein III (Hindi Paperback Sept. 2025)
Original price was: ₹ 250.00.₹ 200.00Current price is: ₹ 200.00.
Book Detail
| Author | Krishan Singh Hada |
| Pages | 100 |
| Book Format | Paperback |
| ISBN 13 | 978-81-991400-1-1 |
| Dimensions | 21.7 x 14.5 x 0.5 cm |
| Item weight | 150 gm |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | September 2025 |
| Book Genre | Poetry |
| Publisher | Bright MP Publisher |
| Seller | Buks Kart “Online Book Store” |
Description
इन कविताओं के पाठ से पहले मुझे इनकी पुख्तगी का अहसास नहीं था। धर्म-ग्रंथों में वर्णित कहानियों, आख्यानों और उनके पात्रों पर बहुत प्रारम्भ से ही प्रश्न उठाये जाते रहे हैं। स्वयं उन ग्रंथों के रचयिताओं ने भी प्रश्न उठाये हैं, किन्तु वे प्रश्न मात्र प्रश्न बन कर रह गए। क्योंकि जिस काल-खंड में वे धर्म-ग्रन्थ लिखे गए, उसकी परिस्थिति–काल गत सीमाओं से उनके रचयिता आबद्ध थे। उनके जीवन-आदर्श भी उस वैचारिकी के इर्द–गिर्द ही घूम रहे थे, जो उस काल-खंड की केन्द्रीय वैचारिकी थी। उस वैचारिकी से मुक्ति की छटपटाहट उनके मानस में नहीं थी, यही कारण था कि वे अपने समय और परिस्थितियों का अतिक्रमण न कर सके। यह उनका उद्देश्य भी नहीं था। किन्तु यह निर्विवाद है कि उन्होंने तत्कालीन समाज का,जैसा जीवंत, वैविध्य्मय और कलात्मक चित्रण किया, वह आज भी जन-मानस में गहराई से समाया हुआ है। उन धर्मग्रंथों के पात्र अपनी तमाम अंतर्कथाओं के साथ लोक-मन और स्मृति-कोष के अभिन्न हिस्से बने हुए हैं। लोक उन्हें मात्र किस्से–कहानियों के पात्र नहीं मानता, अपितु इतिहास और परम्परा की तरह मानता और समझता है। वह उनके देवत्व और अमरत्व के प्रति भी शंकालु नहीं, अपितु अपने वर्तमान जीवन की भी प्रेरक शक्ति मानता है। लोक-मानस की यह अभिव्यक्ति विभिन्न तीज-त्यौहारों, सामाजिक–धार्मिक जीवन में भी निरंतर परिलक्षित होती है।





