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Mahamansavi Baba Banadas (Hindi Paperback, July 2025)

Original price was: ₹ 251.00.Current price is: ₹ 200.00.

Book Detail

AuthorDr. Dinesh Chand Gupta ‘Ravikar’
Pages127
Book FormatPaperback
ISBN 13978-81-19545-44-5
Dimensions21.7 x 14.5 x 0.5 cm
Item weight150 gm
LanguageHindi
Publishing YearJuly, 2025
Book GenrePoetry
PublisherBright MP Publisher
SellerBuks Kart “Online Book Store”
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Description

12 अप्रैल 2024 अयोध्या-धाम की यात्रा विशेष है, इसी दिन नागेश्वर नाथ मंदिर से बाहर निकलते हुए संत अंकित दास से भेंट हुई। परिचय हुआ, चर्चा हुई तो संत अंकित दास ने बाबा बनादास द्वारा स्थापित भव हरण कुंज आश्रम के बारे में बताया एवं बाबा की चौसठ साहित्यिक आध्यात्मिक ग्रंथों के अंदर झाँकने का सुअवसर दिया। इस प्रकार आपके हाथ में सुशोभित मेरे इस चौथे प्रबंध-काव्य, “महामनस्वी बाबा बनादास” की शुरुआत हुई। आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ० रामकुमार वर्मा जैसे साहित्यकारों ने बाबा बनादास पर कलम तो चलाई लेकिन दो-चार पृष्ट लिखकर ही थम गए। जबकि यह ऐसा दिव्य-स्थान है, जहाँ आजादी के महानायक सुभाष चंद बोस ने तथाकथित विमान दुर्घटना के बाद गुप्त रूप से अपने कई वर्ष व्यतीत किए। सुना, पढ़ा, समझा और प्रबंध काव्य की ओर बढ़ा। इस प्रबंध -काव्य की रचना करते हुए ऐसा प्रतीत होता रहा कि स्वयं बाबा बनादास मार्गदर्शन कर रहे हैं। भगवती शांता, धरती आबा, महाराजा सुहेलदेव के बाद यह चौथा प्रबंध-काव्य आपके स्नेह के लिए लालायित है।

दिनेश रविकर

संत शिरोमणि बाबा बनादास जो स्वयं एक प्रतिष्ठित कवि थे एवं जिनकी साहित्यिक कृतियों ने प्रबुद्ध पाठकों एवं भक्तों पर व्यापक असर डाला है, उन पर प्रबंध-काव्य लिखना जोखिम भरा काम हो सकता था, लेकिन श्री दिनेश रविकर ने स्वप्रेरणा से यह चुनौती स्वीकार की। यह पुस्तक एक सामान्य पुस्तक ही होकर रह जाती यदि बाबा बनादास के वंशज और अशोक पुर आश्रम के पीठाधीश संत अंकित दास ने आवश्यक तथ्य न उपलब्ध कराए होते, इसलिए सर्वप्रथम उन्हें बहुत-बहुत साधुवाद।

डॉ० भानु प्रकाश सिंह (प्राचार्य)

शक्ति स्मारक संस्थान (स्नातकोत्तर महाविद्यालय)

दुल्हिनपुर, बलरामपुर

अन्तर-सलिला सरयू की शस्य-श्यामला पावन भूमि गोण्डा की धरती पर नंदिनी गोवंश का सुधा-पान कर जिन संतो ने सगुण साहित्य की काव्य धारा को प्रवाहित किया उनमें गोस्वामी तुलसीदास के साथ-साथ महामनस्वी बाबा बनादास का नाम भी आदर के साथ लिया जाना चाहिए। वीतरागी संत के रूप में उनकी गणना अयोध्या के सिद्ध महात्माओं मे तो होती है किन्तु अखिल भारतीय स्तर पर बाबा और बाबा की साहित्यिक धरोहर उपेक्षित ही रही है। भगवता कृपा से उन्होने अपने भवहरण कुंज में 64 ग्रंथों की रचना कर डाली थी। उनका बहुमूल्य साहित्य कहीं विलुप्त न हो जाए इस दिशा में बाबा बनादास के वंशज यानी मेरे बाबा रघुनाथ सिंह ने बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में उल्लेखनीय कार्य किया। उसी क्रम में वहीं काम, इस इक्कीवीं सदी में बाबा के आशीर्वाद से, उनके वंशज के रूप में, मैंने करने का प्रयास किया है।

अंकित दास

पीठाधीश महात्मा बनादास स्मारक जन्मभूमि अशोकपुर,

नवाबगंज, जनपद गोंडा, (उत्तर प्रदेश)

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