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Shivnath Pramanik “Manik” Ke…. Paperback (March 2024)

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Books details (Coming Soon!)

AuthorSoni Kumari
Pages147
Book FormatPaperback
ISBN 13978-81-19545-56-8
Dimensions21.7 x 14.5 x 0.7 cm
Item weight200 gm
LangaugeHindi (Khortha)
Publishing YearMarch 2024
Book GenreBiography
PublisherBright MP Publisher
SellerBuks Kart “Online Book Store”

2 in stock

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Description

प्रकृति की गोद में बसे झारखण्ड का गर्भ सदैव प्राकृतिक सम्पदाओं से भरा रहा जिसपर बाहरी लोग सर्वथा अपनी कुदृष्टि फेरते रहे हैं। प्रकृति की पूजा करने वाले झारखण्ड वासियों को शोषित कर बाहरी यहाँ के सम्पदाओं को लूटकर ले जाते। पीड़ितों की इसी आवाज़ को खोरठा साहित्य के प्रसिद्ध कवि शिवनाथ प्रमाणिक जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बुलंद किया है।

साहित्य समाज का दर्पण होता है जिसके माध्यम से समाज की रूप-रेखा तय होती है। खोरठा भाषा और साहित्य का विकास भी काफी जोरो-शोरों से हो रहा है। साहित्य का आधार स्तम्भ लोक साहित्य ही होता है। झारखण्ड के खोरठा साहित्य में शिवनाथ प्रमाणिक जी का नाम अत्यंत आदर और आत्मीयता के साथ लिया जाता है। भिन्न-भिन्न व्यक्तियों, विचारों, संस्कृतियों, परम्पराओं, ज्ञान, शोषण और अनुभव ने निश्चय ही प्रमाणिक जी को महान प्रतिभा और आत्मविश्वास से भर दिया, जिसका सदुपयोग उन्होंने अपनी उपेक्षाओं के बीच में भी विभिन्न रचनाओं के माध्यम से खोरठा साहित्य की श्रीवृद्धि करने में निरन्तर किया। विशेषकर जनवादी प्रवृति ने प्रमाणिक जी को पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना से तो सम्पन्न किया ही, साथ ही उन्हें जनपक्षधर भी बनाया, जिससे कालांतर में उनकी लेखनी निरन्तर जनता की आवाज़ बनती चली गई। अधिकतर रचनाएँ इन्होंने खोरठा भाषा और पद्य विधा में ही लिखीं हैं किंतु स्वाध्याय के बल पर इन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत उर्दू आदि भाषाएँ भी सीखीं।

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