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Vivekanand Ke Kabir Hindi Paperback Dec. (2023)

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Book Detail

Author/EditorSadhu Jagjeevan Saheb Parkhi
Pages134
Book FormatPaperback
ISBN 13978-93-91143-46-4
Dimensions21.0 x 14.0 x 5.0 cm
Item weight200 gm
LanguageHindi 
Publishing YearDecember 2023
Book GenrePoetry
PublisherBright MP Publisher
SellerBukskart “Online Book Store”

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Description

“मेरी मृत्यु के उपरांत सम्पूर्ण बैरवा समाज यह अवश्य अनुभव करेगा कि अपमान से सम्मान व अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर करने के लिए ही मैने बैरवा समाज की स्थापना की थी।”

                                                                                                                      सद्गुरु विवेकानंद साहेब

                                                                                                                               (बीजकपाठी)

कबीरपंथाचार्य सद्गुरु विवेकानंद साहेब, बीजक पाठी 13 नवंबर 1901 – 18 अप्रैल 1963 कालखंड के महान् चिंतकों, विचारकों, आधुनिक समाज के प्रवर्तक, लेखक एवं वक्ताओं में से एक ऐसे संत थे, जिन्होंने आधुनिक बैरवा समाज की परिकल्पना की। उन्हें बैरवा समाज का दार्शनिक, चिंतक, वक्ता एवं ऐसा संत माना जाता है जिन्होंने दलित समाज का मुकम्मल आधुनिकीकरण कर बैरवा समाज की आधारशिला रखी। उस समाज की हीनभावना, कुंठा, असमानता व अशिक्षा तथा धार्मिक स्वतंत्रता को रेखांकित किया जिस का खात्मा दलित समाज ही नहीं वरन् भारतीय समाज व्यवस्था में अत्यंत अनिवार्य समझा और अनिवार्य था। उनका विशेष आभामंडल, तर्क शैली, अभिव्यक्ति व विचित्र तेवरों का परिचय तब हुआ, जब देश आजाद हुआ। संविधान लागू हुआ और उसमें प्रदत संपत्ति, धार्मिक आजादी, अभिव्यक्ति की आजादी, जैसे मौलिक अधिकार देश के अमीर – गरीब, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी वर्ग के लोगों को एक समान रूप से प्राप्त हुए।आशा करता हूँ कि आपको यह ग्रंथ अवश्य पसंद आएगा और आप इसमें संग्रहित शब्दों-साखी एवं विचारों का लाभ अवश्य उठा पाएंगे। मुझे मालूम है कि आप इन शब्दों के माध्यम से अपने अनमोल जीवन को बहुत ही सुंदर और उपयोगी बनाने में सफल होंगे।ऐसी मेरी कामना और शुभेच्छा है।

जगजीवन साहेब पारखी

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